बुधवार, 14 जनवरी 2009

एक दिन, कई

साल का कोई कोई दिन बड़ा होता है- इतना बड़ा कि हम उस दिन को त्यौहार कहते हैं- उस दिन हम गले मिलते हैं- मिठाईयां बांटते हैं- लेकिन राजनैति का व्याकरण हमारे समाज के ढांचे से अलग है- यहां बड़ा दिन बड़े पोलिटिकल ड्रामों से शुरू होता है- और बड़े नाटकों के साथ ही खतम होता है- इस मायने में आज के दिन को भी बड़ा कहा जा सकता है- बसपाई आज बड़ा दिन मना रहे हैं क्योंकि मायावती आज 53 साल की हो गई हैं- सपाईयों को बड़ा दिन बनाने का मौका मिल गया है क्योंकि बसपाईयों के बड़े दिन में उसे अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने का मौका मिल गया है- सपाई, बसपाईयों के बड़े दिन पर थू- थू कर रहे हैं और बसपाई सपाईयों की इस हरकत पर उसे धिक्कार रहे हैं- इस बीच पारा कांग्रेस का भी चढ गया है- कांग्रेसियों ने ऐलान किया है कि भले ही यहां उनके हाथ पिछले दसियों सालों से खाली रहे हों लेकिन ललकार तो वो भी सकते हैं- कांग्रेस ने इस राजनैतिक बड़े दिन का नाम ललकार दिवस रखा है तो भाजपा ने उसकी ललकार, बसपा की धिक्कार और सपा के थू-थू का विरोध करना शुरू कर दिया है- भारतीय जनता पार्टी आज अपना विरोध दिवस मना रही है लेकिन इस ऊहापोह में है कि विरोध करे तो किसका- सबके बड़े दिन से उनका बड़ा दिन अलग हो इस लिए भाजपा ने सड़कों पर भीख मांगी- जेल तक भरी- अब जब बड़े बड़े दल एक छोटे से ठंडे दिन को बड़ा करने पर उतारू हों- तो छोटे भाई बंधु कैसे पीछे रह सकते हैं- भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा ने सुहाग बचाओ दिवस मनाने का ऐलान किया है वहीं लोकदल धरना देकर अपना दिन बड़ा कर रहा है- राजनैतिक दलों की दिन बड़ा करने की कोशिश के बीच आम जनता का भी बड़ा हो गया है- सूर्य उत्तरायण हो गये हैं- सब अच्छे अच्छे काम करने का वक्त शुरू हो गया है- आशा है ये बड़ा दिन इन राजनैतिक दलों के साथ साथ जनता को भी कुछ फायदा देगा- देवेश वशिष्ठ

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